पहला स्पर्श

उस शाम शहर सो रहा था। बारिश की पहली बूँदें खिड़की पर टपकने लगीं — टप… टप… टप… जैसे कोई अनजान उँगली धीरे-धीरे दरवाजा खटखटा रही हो। रिया अकेली थी। उसने लाल रंग की सिल्क की साड़ी पहनी थी — पतली, चिपकने वाली, जो उसके बदन की हर लकीर को उभारा देती थी। उसकी आँखें किताब पर थीं, लेकिन मन कहीं और।

हवा ठंडी थी। उसने अपना पल्लू सरकाया। गर्दन पर फैली हुईं लटें हटाईं। उसकी त्वचा नरम थी — जैसे मक्खन, जैसे बादल। बारिश की नमी ने उसे और भी कोमल बना दिया। उसने गहरी साँस ली। उसकी छाती ऊपर-नीचे हुई। निप्पल साड़ी के अंदर कड़े हो गए — हल्के से, जैसे कोई छिपी हुई आग जाग रही हो।

दरवाजे पर दस्तक हुई। “कौन?” — उसकी आवाज़ में एक हल्की सी कंपकंपी थी।

दरवाजा खुला। आरव अंदर आया। उसका सफेद शर्ट गीला था। बालों से पानी टपक रहा था। उसकी आँखें रिया पर टिक गईं — जैसे कोई भूखा शेर पहली बार शिकार देखता हो। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। सिर्फ मुस्कुराया।

“बारिश में फँस गया,” उसने कहा। उसकी आवाज़ गहरी थी — जैसे कोई पुराना वायलिन, जिसकी तारें अभी-अभी छुई गई हों।

रिया ने किताब बंद की। उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं। वह उठी नहीं। सिर्फ सोफे पर सरकी — थोड़ा सा, जैसे उसे जगह दे रही हो। आरव पास बैठ गया। दूरी थी — दो हाथ की। लेकिन हवा में कुछ था। एक गर्मी। एक नमी।

बारिश तेज़ हो गई। बिजली चमकी। कमरे में एक पल की रोशनी फैल गई। आरव का चेहरा साफ दिखा — नुकीली नाक, गहरी आँखें, होंठ जो हल्के से भीगे हुए थे।

उसने धीरे से हाथ बढ़ाया। लेकिन छुआ नहीं। सिर्फ उसके बालों के पास। उँगलियाँ हवा में रुकीं। फिर… छुआ

एक बाल की लट। उसकी उँगलियाँ उसमें उलझ गईं। हल्के से खींची। रिया की गर्दन पीछे झुकी। उसकी साँस रुक गई।

“ठंड लग रही है?” — आरव ने फुसफुसाया। उसकी साँस रिया की गर्दन पर लगी — गर्म, नम।

रिया ने सिर हिलाया। लेकिन उसकी आँखें कह रही थीं — नहीं… मुझे गर्मी लग रही है।

वह करीब आई। उसका कंधा आरव के कंधे से छुआ। सिर्फ छुआ। लेकिन जैसे बिजली का करंट। आरव का हाथ उसकी कमर पर सरका — साड़ी के ऊपर से। उँगलियाँ कपड़े में दब गईं। नीचे की गर्मी महसूस हुई।

रिया ने अपना हाथ उसके सीने पर रखा। दिल की धड़कन तेज़ थी। धक-धक… धक-धक… जैसे कोई ढोल बज रहा हो। उसने शर्ट के बटन खोले। एक। फिर दूसरा। हर बटन के साथ उसकी उँगलियाँ उसके सीने की गर्म त्वचा को छूतीं।

आरव ने आँखें बंद कर लीं। उसकी साँसें गहरी हो गईं।

“रिया…” — उसका नाम उसके होंठों पर जैसे मंत्र बन गया।

रिया झुकी। उसके होंठ उसके गले पर गए। पहले सिर्फ स्पर्श। फिर हल्की सी चुसकी। आरव का हाथ उसकी पीठ पर सरक गया। साड़ी के हुक खोले। एक। फिर दूसरा। कपड़ा ढीला हुआ। लेकिन गिरा नहीं। अभी समय था।

वे सोफे पर लेट गए। बारिश की लय में।

आरव ने उसकी साड़ी का पल्लू सरकाया। पेट की नरम त्वचा उघड़ी। उसकी उँगलियाँ वहाँ घूमीं — गोल-गोल, हल्के दबाव से। रिया की कमर ऊँची हुई। एक आह निकली — आह्ह्ह… धीमी, लंबी।

“और…” — उसने फुसफुसाया।

आरव मुस्कुराया। उसके होंठ उसके नाभि पर गए। जीभ की नोक से छुआ। गीला स्पर्श। रिया की उँगलियाँ उसके बालों में कस गईं। खींचते हुए। उसकी साँसें अब अनियमित थीं। बदन में एक लहर दौड़ रही थी — धीमी, लेकिन बढ़ती हुई।

आरव उठा। उसे गोद में उठाया। बेडरूम की ओर चले। वहाँ रोशनी मद्धम थी — सिर्फ एक लैंप। उसने उसे बिस्तर पर लिटाया। खुद उसके ऊपर झुका।

साड़ी अब पूरी तरह सरक चुकी थी। सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट। उसके हाथ ब्लाउज के हुक पर गए। लेकिन रुके। पहले होंठ।

उसके होंठों पर। धीरे से चूमा। जीभ बाहर निकली। होंठों की रूपरेखा ट्रेस की। रिया ने जवाब दिया। अपनी जीभ से उसकी मिलाई। चुम्बन गहरा होता गया — लेकिन तेज़ नहीं। जैसे शराब की चुसकी। धीरे-धीरे नशा चढ़ता हुआ।

उसके हाथ अब उसके स्तनों पर। ब्लाउज के ऊपर से। हल्के से दबाते। रिया की सिसकारी निकली। आँखें बंद।

आरव ने ब्लाउज खोला। ब्रा सरकाई। उसके स्तन उघड़े — गोल, नरम, निप्पल कड़े। उसने एक को मुँह में लिया। जीभ से घुमाया। चूसा। धीरे। बहुत धीरे।

रिया का बदन काँप रहा था। पैर आपस में रगड़ रहे थे। नीचे की गर्मी बढ़ रही थी। एक नमी फैल रही थी।

“आरव… छूओ ना…” — उसने विनती की।

आरव का हाथ पेटीकोट के अंदर सरका। जाँघों पर। त्वचा मुलायम। गर्म। उँगलियाँ ऊपर चढ़ीं। लेकिन रुकीं। पहले जाँघों की अंदरूनी सतह पर। हल्के से सहलाते।

रिया की साँसें उखड़ रही थीं। कूल्हे ऊँचे हो रहे थे।

आखिरकार, उसकी उँगलियाँ वहाँ पहुँचीं — पैंटी के ऊपर से। गीलेपन को महसूस करते। वह दबाया। गोल-गोल घुमाया।

रिया की आहें अब लंबी थीं। बदन में कंपकंपी।

“अंदर… please…”

आरव ने पैंटी सरकाई। उँगलियाँ अंदर। गीला। गर्म। तंग। धीरे से एक उँगली अंदर-बाहर। फिर दो।

रिया का हाथ उसके पैंट पर गया। ज़िप खोली। उसका लिंग बाहर आया — कड़ा, गर्म, नसें उभरी हुईं। उसने उसे पकड़ा। ऊपर-नीचे सहलाया।

आरव की साँसें तेज़। लेकिन वह रुका। अभी नहीं।

उसने उसे चूमा। जीभ से सिरा छुआ। नमकीन स्वाद। गर्मी। रिया ने मुँह में लिया। धीरे से चूसा। जीभ घुमाई।

अब… डालो…

अब वे नंगे थे। त्वचा से त्वचा।

आरव उसके ऊपर। लिंग उसके योनि पर रगड़ता हुआ। लेकिन अंदर नहीं। पहले बाहर। गीलेपन में फिसलता।

रिया की आँखें विनती कर रही थीं।

“अब… डालो…”

आरव ने धीरे से धक्का दिया। सिरा अंदर। रिया की चीख — दर्द मिश्रित सुख। वह रुका। फिर धीरे-धीरे आगे। पूरा अंदर। गहराई तक।

वे रुके। महसूस करते हुए — एकता। गर्मी। स्पंदन।

धक्के शुरू हुए — धीमी, लंबी। हर धक्के के साथ रिया की आहें। उसके नाखून उसकी पीठ पर।

बारिश बाहर तेज़। अंदर उनकी लय।

आरव की उँगलियाँ उसके क्लिटोरिस पर। घुमाते हुए।

रिया का बदन तन गया। एक लहर आई — धीमी, लेकिन शक्तिशाली। वह चरम पर पहुँची। योनि सिकुड़ती हुई। गीला बहता हुआ।

आरव ने गति बढ़ाई। लेकिन अभी नहीं। वह रुका। उसे किस किया।

फिर शुरू। अब तेज़ लेकिन कोमल।

रिया की दूसरी लहर। फिर तीसरी।

आखिरकार, आरव का समय — गर्म वीर्य अंदर। भरता हुआ।

वे लिपटे रहे। साँसें मिली हुईं। बारिश की बूँदें खिड़की पर।

रिया की उँगलियाँ उसके सीने पर घूम रही थीं। आरव का हाथ उसकी कमर पर।

“फिर से?” — उसने फुसफुसाया।

रिया मुस्कुराई। उसकी आँखें चमक रही थीं।

बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। और उनकी आग… धीमी जल रही थी।

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