जून की रात, हवा भी जैसे आग उगल रही हो। बिजली कटी हुई थी, पंखा रुका हुआ। मैं बिस्तर पर नंगा लेटा था, लंड आधा खड़ा – बस यूं ही हवा से। अचानक दरवाजे पर हल्की-सी खटखट। खोला तो सामने रीना भाभी।
वो एक पतली, लगभग पारदर्शी सफेद नाइटी में थीं। नाइटी इतनी पतली कि अंदर की काली ब्रा और पैंटी साफ-साफ दिख रही थी। पसीने से नाइटी उनके बदन से चिपक गई थी – चूचियों का आकार, निप्पल्स की उभार, पेट की नरमी, जांघों की चमक। उनके बाल गीले थे, शायद नहाकर आई थीं। खुशबू? चंदन और उनकी चूत की हल्की-सी गंध – जो बाद में पता चला।
“राहुल… पानी देना… प्यास से मर रही हूँ…” उनकी आवाज काँप रही थी, लेकिन प्यास पानी की नहीं थी। मैंने गिलास भरा, लेकिन वो अंदर घुस आईं। “अकेले रहते हो ना? कोई नहीं आता-जाता?” वो सोफे पर बैठीं, पैर ऊपर करके। नाइटी और ऊपर सरक गई – जांघों का वो गोरा हिस्सा, जहाँ पैंटी शुरू होती है, वो साफ दिख रहा था।
हम बातें करने लगे। भाभी ने बताया कि उनका पति 20 दिन से बाहर हैं। “साली जिंदगी सूनी पड़ी है। ना कोई छुए, ना कोई चाटे…” वो हँसीं, लेकिन आँखों में आग थी। मैंने हिम्मत की: “भाभी, आप तो बॉम्ब हो। कोई भी पागल हो जाएगा।”
वो मेरे करीब सरकीं। उनकी जांघ मेरी जांघ से टकराई। गर्मी, पसीना, खुशबू। मैंने उनका हाथ पकड़ा – नरम, गीला। “राहुल… तूने कभी किसी की… चूत चाटी है?” वो फुसफुसाईं। मैंने सिर हिलाया। “चाटी है… लेकिन आप जैसी नहीं।”
वो हँसीं, और अचानक मेरे होंठों पर अपना होंठ रख दिया। किस लंबा, गीला, जीभ अंदर। मैंने उनकी चूचियाँ दबाईं – ब्रा के ऊपर से। निप्पल्स पत्थर जैसे। मैंने ब्रा का हुक खोला – पीठ पर से। ब्रा गिरी। दो बड़े, गोल, भारी चूचे बाहर। गुलाबी निप्पल्स, थोड़े से काले घेरे। मैंने एक को मुँह में लिया – चूसा, काटा, जीभ से गोल-गोल घुमाया। भाभी सिसकारीं, “आह्ह… हाँ… चूस… काट… मेरी चूचियाँ तेरी हैं…”
मैंने नाइटी ऊपर की, सिर के ऊपर से उतारी। अब सिर्फ काली पैंटी। पैंटी के बीच में गीला धब्बा – बड़ा सा। मैंने घुटनों पर बैठकर पैंटी नीचे सरकाई।
वाह! क्या चूत थी!
- बिल्कुल साफ-सुथरी, हल्के काले बाल – सिर्फ ऊपर एक पतली लाइन, बाकी शेव्ड।
- चूत के होंठ गुलाबी, मोटे, थोड़े से बाहर निकले हुए।
- बीच में एक गीली दरार, रस टपक रहा था।
- क्लिटोरिस थोड़ा सा बाहर, जैसे निमंत्रण दे रहा हो।
- खुशबू? मीठी, नमकीन, थोड़ी सी चटपटी – जैसे कोई रसीला फल।
मैंने नाक सटाई – सूंघा। भाभी काँप गईं। “राहुल… सूंघ… मेरी चूत की खुशबू पी ले…” मैंने जीभ निकाली, पहला चाटा – नीचे से ऊपर, होंठों के बीच में। रस का स्वाद – उफ्फ! मीठा, गर्म, चिपचिपा। भाभी की कमर ऊपर उठी, “ओह्ह्ह्ह… हाँ… चाट… मेरी चूत चाट…”
मैंने दोनों हाथों से उनकी जांघें फैलाईं। चूत पूरी खुल गई। मैंने जीभ से होंठों को अलग किया, क्लिट पर हल्के से छुआ। भाभी चीखीं, “आह्ह… वही… वही चाट…!”
- पहला राउंड – धीरे-धीरे: मैंने जीभ से क्लिट को गोल-गोल घुमाया, हल्का दबाव। भाभी की साँसें तेज।
- दूसरा राउंड – तेज: अब जीभ तेज, ऊपर-नीचे, बाएँ-दाएँ। भाभी की गांड हिलने लगी।
- तीसरा राउंड – गहरा: मैंने जीभ चूत के छेद में घुसाई – जितनी अंदर जा सके। अंदर से रस चूसने लगा।
- चौथा राउंड – उँगलियाँ + जीभ: दो उँगलियाँ अंदर, G-स्पॉट पर दबाव। जीभ क्लिट पर। भाभी पागल, “राहुल… मैं मर जाऊँगी… चाट… मत रोक…!”
अचानक भाभी का शरीर अकड़ा। “राहुल… आ रहा है… पकड़…!” मैंने मुँह चिपका लिया। और फिर – फव्वारा! गर्म, मीठा रस मेरे मुँह, नाक, चेहरे पर। मैंने सब पी लिया, चाटकर साफ किया। भाभी हाँफ रही थीं, “कभी किसी ने ऐसा नहीं चाटा… तू चूत चाटने का देवता है…”
मैंने उन्हें पलटा। गांड ऊपर। चूत पीछे से। मैंने गांड के छेद पर जीभ फेरी – भाभी चौंकीं, लेकिन मना नहीं किया। “चाट… वहाँ भी… सब मेरा है तेरा…” मैंने गांड चाटी, फिर चूत, फिर क्लिट। दूसरा स्क्वर्ट। तीसरा।
रात भर:
- 4 बार स्क्वर्ट
- चूत सूज गई, लाल हो गई
- मैंने हर कोने को चाटा – होंठ, क्लिट, छेद, गांड
- भाभी ने मेरे बाल पकड़े, सिर दबाया, “राहुल… रोज आ… तेरी जीभ मेरी चूत की गुलाम है…”
भाभी नहाईं, मेरे मुँह पर बैठीं – एक आखिरी चाट। “तेरा लंड बाद में, पहले जीभ से पेल मेरी चूत को।”
अब हर रात 12 बजे, जब मोहल्ला सोता है, मैं चुपके से जाता हूँ। दरवाजा खुला रहता है। भाभी बिस्तर पर, पैर फैलाए, चूत गीली। मैं घुटनों पर, जीभ बाहर।
सुबह 5 बजे, आकाश में हल्की लालिमा। भाभी ने मुझे बाथरूम में खींच लिया। “चल, साथ नहाएँगे। तेरी जीभ ने रात भर काम किया, अब तेरा लंड भी थोड़ी सी मेहनत करेगा।”
हम नंगे, शावर के नीचे। पानी गर्म, भाप चारों तरफ। भाभी ने साबुन मेरे लंड पर लगाया – 7 इंच का, मोटा, नसें उभरी हुईं। उनका हाथ ऊपर-नीचे, धीरे-धीरे। “कितना सख्त है तेरा… पहली बार किसी का इतना मोटा देख रही हूँ।” मैंने उनकी चूचियाँ साबुन से मलीं, निप्पल्स पर अंगूठे से गोल-गोल।
फिर भाभी घुटनों पर। पानी उनके बालों से टपक रहा था। उन्होंने मेरा लंड मुँह में लिया – सिर्फ सुपारा, जीभ से गोल-गोल। मैं सिहर उठा। “भाभी… धीरे… वरना झड़ जाऊँगा।” वो मुस्कुराईं, “नहीं, आज झड़ना बिस्तर पर है।”
हम बिस्तर पर। चादर गीली, बदन अभी भी पानी से चमक रहा। भाभी मेरे ऊपर, बाल मेरे चेहरे पर। वो किस करने लगीं – होंठ, गाला, कान, निप्पल्स। हर किस के साथ फुसफुसाहट: “राहुल… तूने मेरी चूत को स्वर्ग दिखाया… अब मैं तुझे दूँगी।”
मैंने उन्हें पीठ के बल लिटाया। पैर फैलाए। चूत अभी भी लाल, सूजी हुई, लेकिन रस फिर से टपकने लगा। मैंने लंड का सुपारा उनके क्लिट पर रगड़ा – हल्के से, ऊपर-नीचे। भाभी काँप गईं, “आह्ह… डाल… अंदर… धीरे से…”
मैंने सुपारा चूत के होंठों के बीच रखा। हल्का सा दबाव। सुपारा अंदर। भाभी की साँस रुक गई। “ओह्ह… कितना मोटा… धीरे…” मैं रुका, किस किया, चूचियाँ दबाईं। फिर धीरे-धीरे 2 इंच और। चूत तंग, गर्म, रस से भरी।
“राहुल… पूरा डाल… मैं संभाल लूँगी।” मैंने कमर आगे की – पूरा 7 इंच अंदर। भाभी की चूत ने लंड को निचोड़ लिया। हम दोनों चीखे – खुशी की। मैं रुका, आँखों में आँखें। “भाभी… तुम्हारी चूत… स्वर्ग है।” वो मुस्कुराईं, “तेरा लंड… मेरा राजा।”
मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। हर धक्का गहरा, लेकिन नरम। लंड बाहर तक, फिर अंदर तक। भाभी की चूत से ‘चप-चप’ की आवाज़। उनकी आँखें बंद, मुँह खुला, “हाँ… ऐसे ही… प्यार से… मेरी चूत को प्यार कर…”
मैंने उनकी टाँगें कंधों पर रखीं। अब लंड और गहरा। G-स्पॉट पर टकरा रहा था। भाभी की उँगलियाँ मेरी पीठ पर, नाखून गड़े। “राहुल… तेज… नहीं… धीरे… हाँ… वैसे ही…”
- मिशनरी: मैं ऊपर, किस करते हुए, लंड धीरे-धीरे।
- डॉगी: भाभी घुटनों पर, गांड ऊपर। मैंने पीछे से डाला – गहरा, जोरदार। गांड पर थप्पड़, बाल पकड़े। भाभी चीखीं, “हाँ… पेल… अपनी भाभी को…”
- काउगर्ल: भाभी ऊपर, लंड पर बैठीं। खुद ऊपर-नीचे। चूचियाँ उछल रही थीं। मैंने निप्पल्स चूसे।
भाभी ने कहा, “राहुल… अब तेज… मैं झड़ने वाली हूँ…” मैंने स्पीड बढ़ाई। लंड तेज, गहरा। भाभी की चूत सिकुड़ने लगी। “आह्ह… आ गया…!” उनका स्क्वर्ट – फिर से फव्वारा।
मैंने लंड बाहर निकाला, भाभी के पेट पर, चूचियों पर झड़ा। गाढ़ा, गर्म वीर्य। भाभी ने उंगली से चाटा, “तेरा रस… मीठा है।”
हम गले लगे। पसीना, वीर्य, चूत का रस – सब मिला हुआ। भाभी ने कहा, “राहुल… अब हर रात… पहले चूत चाटना… फिर लंड से चोदना। तू मेरा पति है अब।”
अब हर रात:
- 12 बजे दरवाजा खुला
- पहले जीभ, फिर लंड
- चूत चाटते-चाटते लंड अंदर
- सुबह तक 3-4 राउंड